__________Day 22__________
If you wants to feel how much loneliness does I feel inside my heart, imagine-
मैं किसी बड़े से building के flat में खड़े होकर शाम के बाद धीरे-धीरे फैलता हुआ रात का अंधेरा देख रहा हूँ। धीरे-धीरे फैलता हुआ सन्नाटा या यूँ कहे कि खामोशी के साथ streat lights का हर तरफ़ जलना, लोगों का घर वापस आना और फिर उनके घरों के lights बंद होने से तारों सा चमकता हुआ शहर के lights का जुगनुओं सा धीमा होना देख रहा हूँ। अपने flat से खड़े होकर दूर दूर तक जहाँ तक मेरी आँखें देख सकती हो, मैं देख रहा हूँ। ना जाने कितने दिनों, महीनों, या साल से इस यह अहसास को पाने की उम्मीद में कि कोई पीछे से आये, मेरे हाँथो को पकड़े, मुझे ले जाकर अपने सामने बिठाए, कुछ ना कहे लेकिन मुझे देखकर मुस्कुराए और मुझे अपनी आँखों से पिलाएं। मगर एक पल में सब कुछ भूल जाओ, यह ख़्वाब भूल जाओ। क्योंकि ना जाने मैं कब से वहाँ वैसे ही खड़ा हूँ, अकेले। उस अहसास को पाने की आस में, मगर उस flat में मेरे अलावा और कोई नहीं रहता। मैं बस अकेला रहता हूँ उस ऊँचाई में, चमकता हुआ शहर को देखता हुआ, मगर बस अकेले...
18th Feb. '21
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