__________Day 44__________
Dream of our Life:-बचपन में हम रामप्रसाद चंद्रभान सरस्वती विद्या मंदिर, बाजार समिति, रामगढ़ में पढ़ते थे। वहाँ प्रतिदिन सुबह प्रार्थना के बाद हमें प्रेरक प्रसंग सुनाई जाती थी। जिसमें एक दिन प्रसंग के बाद हमें उसके संदेश समझाकर यह प्रेरित किया जा रहा था कि, "मेहनत करके पढ़ाई-लिखाई करो, ताकि तुम्हारा और तुम्हारे साथ साथ तुम्हारे परिवार और समाज का नाम रौशन हो। ताकि एक दिन तुम्हारा भी अख़बार में नाम छपे और लोग तुम्हारे बारे में पढ़े।" वहाँ प्रार्थना सभा में 12-15 लंबी पंक्ति लगती थी। जिसमें एक पंक्ति में कम से कम 20-25 से ज्यादा विद्यार्थी दर्री में बैठते थे। हम लोग थोड़ी शैतानी करने के लिए अक़्सर बीच से पीछे ही बैठते थे। उस दिन लड़कियों की पंक्ति में बबिता बैठी हुई थी, उसके बगल में मैं बैठा हुआ था, और मेरे आगे ओम प्रकाश, उसके बगल में रवि।
आगे प्रसंग सुनने के बाद बबिता बोली, "इतना मेहनत करके एक दिन अखबार में नाम छपने का क्या फ़ायदा ! उसे कोई पढ़ता है, बहुत नहीं पढ़ते हैं। जो पढ़ते हैं वो भी अगले दिन भूल जाते हैं।"
बबिता की बात सुनकर ओम प्रकाश बोला, "मैं ऐसा काम करूँगा कि अख़बार में रोज मेरा नाम आए। तब तक, जब तक कि उन्हें मेरा नाम याद ना हो जाए।"
प्रकाश की बात सुनकर रवि बोला, "मैं तुम्हारे साथ हूँ। तुम जो करोगे मैं भी वही करूँगा।"
उसके बाद मैं कहाँ पीछे रहने वाला था ! मैंने कहा, "मुझे अपना नाम अखबार में नहीं, बल्कि बच्चों की किताबों में चाहिए। ताकि पास होने के लिए मेरे बारे में पढ़कर उसे याद रखना ही पड़े। जैसे हमें दूसरों का करना पड़ता है।"
मेरी बात सुनकर बबिता बोली, "मुझे फ़र्क नहीं पड़ता है कि लोग मुझे जाने या ना पहचाने। मुझे मेरे ख़्वाब को पूरा करने का मौका मिले, मुझे चाँद के पार जाने का मौका मिले, बस...।"
तब-तक मनोज आचार्यजी हमारे सामने आ चुके थे और वह बबिता की आधी बात सुन लिए थे। हम चारों को माथे में एक-एक थाप मारे और बोले, "पढ़ेगा-लिखेगा नहीं, बस आलतू-फालतू ख़्वाब देखना है और यहाँ बैठकर सुनने के जगह आपस में बात करना है।"
यह सुनकर हम चारों अपना मुंडी गाड़ दिए।
आज, ओम प्रकाश I.Sc. करने के बाद B.J.M.C. करके journalism का practice कर रहा है। उसके पीछे-पीछे रवि भी साथ में वही किया और अब दोनों मिलकर Jhar News Khorta के नाम से News Channel शुरू करके उसे चला रहा है। मैं B.A. और M.A. में English Literature की पढ़ाई के साथ-साथ Global Literature को समझने की करते हुए अपने स्तर पर अच्छी-अच्छी poems और कहानियाँ लिखने की कोशिश करता रहा हूँ। और बबिता... ऐसा बिल्कुल नहीं है कि उसके ख़्वाब का कोई आधार नहीं था। वह Delhi University से B.Sc. करने के बाद अब अपना Masters complete करके I.S.R.O. में space research scientist बनने की कोशिश कर रही है। उस वक़्त, जब हम बच्चें थे, हमारा ख़्वाब बड़ो को पागलपन लग रहा था। मगर हम पागल, हमनें अपनी जिद्द कभी नहीं छोड़ी। हमें थोड़ा वक़्त और लगेगा, मगर हमारे ख़्वाब जरूर पूरा होंगे। बबिता चाँद पर जाएगी, प्रकाश रवि के साथ उसका interview लेने जाएगा, और मैं उसकी जीवनी लिखूँगा।
Moral of the tale- "हमारे ख़्वाब कोई और नहीं समझ सकते, हमारा जिद्द उन्हें पागलपन लगता है। अगर हम उनकी बातें सुनकर अपना जिद्द छोड़ने लगे, अपने ख्वाबो को खुद तोड़ने लगे, तो बचेगा क्या ! जिद्द किसकी करनी चाहिए, किसकी नहीं करनी चाहिए और उसे कैसे पूरा करना है, इसकी समझदारी develope करनी चाहिए। पर ख़्वाब देखना और उसको पूरा करने की जिद्द नहीं छोड़नी चाहिए। यह inspiration हमें Dr. A.P.J. Abdul Kalam साहब देते हैं।"
-AnAlone Krishna
1st June, 2022 A.D.
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