I, Krishna, present you here, my 100+ literary works—poems and stories. I hope, I shall plunder your heart by these. Let you dive into my imaginary world. I request you humbly to give your precious reviews/comments on what you read and please share it with your loved ones to support my works.

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"Life की परछाई: Chapter 4Chapter 5Chapter 6Chapter 7 • Chapter 8 • Chapter 9" has published on 8th August, 2025. अगर आपको online reading में असुविधा होती है, और आप इसे printed form में पढ़ना चाहते हो, तो post के bottom में दिए 'Download and Print' button को click करके आप उसका printout करवा लेना। जिसमें 'Download and Print' button नहीं है उसके लिए आप 'Google form' को भरकर मुझे send कर दो, मैं आपको pdf भेज दूंगा। इसके अलावा सबसे अंत में UPI QR code भी लगा हुआ है, अगर आप मेरे काम को अपने इक्षा के अनुरूप राशि भेंट करके सराहना चाहते हो तो, आप उसे scan करके मुझे राशि भेंट कर सकते हो। जो आप वस्तु भेंट करोगे, वो शायद रखा रह जाए, परंतु राशि को मैं अपने जरूरत के अनुसार खर्च कर सकता हूँ। ध्यानवाद !
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 Let change the world. Let change the mentality. Let wear what we want.

Let wear in what we feel comfort.
बचपन में मैं भी सभ्यता, संस्कृति को पहनावे से जोड़ कर उसे बचाने की कोशिश करता था। पर फिर, मैंने अपने school के आखरी 2 साल में औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद, विश्व युद्ध और पहनावे की संस्कृति के बारे में पढ़ा। खासकर यह कि कैसे धीरे-धीरे लोगों के पहनावें में परिवर्तन आया।
• पहले लोग जैसे-तैसे कपड़ो को लपेटते थे। सिलाई और कढ़ाई की गई कपड़ो को सिर्फ वो लोग ही पहन पाते थे जो इन्हें affort कर पाते थे।
• फिर, आम लोग साधारण कपड़े पहनते थे और सामर्थ्य लोग एक से एक model के कपड़े पहनना शुरू किए। जिसमें परुष tight और मोटे कपड़े तथा स्त्रियां हल्के और लंबे कपड़े पहनना शुरू की।
• जब औद्योगिक क्रांति हुआ तो साधारण लोग भी सुंदर कपड़े affort करने लगे। पर कारखानों में काम करने की वजह से मोटे कपड़े जल्दी गंदे होने लगे और धुलने में बहुत दिक्कत होती थी। जिसके चलते jeans का अविष्कार हुआ। स्त्रियों को भी लंबे, जमीन से सटे गाउन की वजह से अपने दैनिक कार्यो को करने में और उसे संभालने में परेशानी होती थी, इसलिए उसकी लंबाई एड़ी तक आ गई।
• विश्व युद्ध के परिणाम स्वरूप स्त्रियों को ही घर भी संभालना पड़ता था। इसलिए उन्हें कारखानों में काम करना शुरू करना पड़ा। इसके बाद उनके कपड़े भी tight और थोड़े और छोटे हो गए।
• आज के दौर में लोग यह बात भूल गए हैं कि कपड़ो को हम अपने comfort को ध्यान में रखकर choose करते हैं कि हमें क्या पहनना चाहिए। आज हम लोग दूसरों को दिखाने और जलाने के लिए fashion में एक से एक कपड़े पहनते हैं।
• आज लोग बस सिर्फ एक event में पहनने के लिए और लोगों को लोग अपनी औकात दिखाने के लिए कि देखो मैं किस level तक जा सकता हूँ, लोग कितने खर्चे करते हैं, आप सभी तो जानते ही हो।
खैर, सबकी अपनी-अपनी पसंद, सबकी अपनी-अपनी इक्षा। मुझे उन्हें कुछ भी नहीं कहना है और ना ही उनसे मुझे घृणा है। सभी अपनी पसंद के अनुसार अपनी जिंदगी जीने के लिए स्वतंत्र है।
मैंने आज तक नहीं सुना या पढ़ा है कि किसी उपनिषद या शास्त्रों में इसके बारे में लिखा गया है कि शादी में क्या पहनना चाहिए या क्या नहीं। आपको जो सुविधा या पसंद हो, आप वो पहन सकते हो। कोई जरूरी नहीं कि शेरवानी या कुर्ती पहनों, jeans में भी चाहो तो शादी कर सकते हो।
To my love- "तुम्हें अगर हमारी शादी में simple jeans में ही शादी करनी हो, फ़िजूल के पैसे खर्च करने के जगह पर अपने लिए नए कपड़े खरीदकर अपने सारे पुराने कपड़े गरीबों में (या भाई/ बहनों में) बाँटने का मन हो, अगर 4 तंबू गाड़कर सिर्फ चंद करीबी लोगों के मौजूदगी में ही simple से simplest तरीके से मुझसे शादी करनी हो, और बचने वाले बाकी पैसों को अगर किसी अच्छे काम में लगाने का मन हो, तो भी मैं तैयार हूँ। मुझे तुम्हारा पति कहलाने में गर्व महसूस होगा।"
Note:- मैं किसी से यह expect नहीं कर रहा हूँ कि वो ये सब करे। लेकिन उसे अगर यह करने का मन हो, तो हाँ मैं तब भी उसका support करूँगा और उसके साथ खड़ा रहूँगा। अगर वह किसी traditional कपड़े के जगह jeans में ही मुझसे शादी करने की इक्षा करे तब भी...

13th December, 2020 A.D.

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