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Day 9 | Diary of AnAlone Krishna

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_____Day 9_____

एक रात मैंने एक dream देखा था। वही, जब लगभग मैं sem 2 या 3 में होऊँगा। मैं किसी bridge पे था। बीच में। वह bridge काफी लंबा था। मगर वहां कोई गाड़ियाँ नही चल रही थी। बस लोग ही उस bridge से आर पर हो रहे थे। दोपहर का समय होगा शायद, एक आध लोग आ जा रहे थे और वैसे जगह में आस पास कोई ठेले वाला नही था, और ना ही कोई और कुछ बेचने वाला। क्योंकि ऐसे place में सुबह शाम कुछ ज्यादा ही भीड़ होती है ना ! मेरे सपनों में problem यही होती है हमेशा- मुझे समय का पता नही चलेगा कि दिन है या रात, सुबह है या शाम; दूर की चीजें दिखाई नही देंगे, या तो सबकुछ dark लगेगा या फिर बहुत bright जिससे मैं कुछ भी आगे देख ना सकूँ। मेरे साथ कोई लड़की थी। वह उदास थी। मेरे सामने वह रो भी रही थी। वह किसी को बहुत पसंद करती थी। उसे उसने propose भी किया था। थोड़ी देर पहले। मगर वह उसे reject कर दिया था, इसलिए वह अपनी भड़ास निकालने के लिए जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर दुनियाँ को, किस्मत को, life को कोस रही थी। एकदम पूल के किनारे पे खड़ा होकर। मैंने उसका हाँथ पकड़ा और प्यार से कहा, "अब शांत हो जाओ, और चलो नीचे उतरो।" और वह उतर भी गई। शायद हम अच्छे दोस्त होंगे इसलिए वह मेरी बात को इतने आसानी से मान गई। क्या पता ! Dream के सारे किस्से याद थोड़ी ना रहते हैं। बस कुछ ही हिस्से ऐसे होते हैं की याद रह पाते हैं। बाकी हम भूल जाते हैं, जिससे कइयों को यह लगता है कि हम सपने ही नही देखते। या फिर शायद बहुत लोग सच में सपने नही देखते होंगे। क्या पता ! वह लड़की नीचे उतर कर अपने उदास मन से बोली, "यार, जिसको पसंद किया, जिसको चाहा, ना तो वह मुझे या मेरी feelings को समझा और ना कभी समझना चाहा। यार, ऐसा क्यूँ होता है कि कोई जिसे बहुत पसंद करता है उसे उसकी जरा सा भी परवाह नहीं होती ?" अब इसका जवाब कौन इंसान दे सकता है भला ! यह तो शायद बस वही किस्मत लिखने वाले भगवान दे सकते हैं जिन्होंने सबकी ऐसी किस्मत लिखी है। खैर, वह आगे बोली, "जितना तुम मेरी बस best friend होकर care करता है, मुझे समझता है, मुझे कोई और कभी मिलता क्यूँ नही ? तुम्हारी friendship मुझे हमेशा के लिए चाहिए। तुम बस इसी तरह मेरा friend रहो, मगर मेरे साथ हमेशा रहो।" मैंने उसे संभालते हुए बोला, "यार उदास मत हो। तुम्हें तुम्हारा पसंद भले नहीं मिला, पर शायद किसी का दिल अब ना टूटे। अगर तुम चाहो तो। अगर जो तुम्हें चाहे और तुम उसे समझो तो। तुम यह मत सोचों ना कि जिसे तुमने चाहा उसने तुम्हें नहीं accept किया तो बुरा हुआ। यह तो अच्छा ही हुआ ना कि जिसके दिल में तुम्हारे लिए कभी feelings नही थी वह खुद ही तुमसे दूर चला गया। अब तुम्हें वो मिल सकता है जो तुम्हें चाहता हो। अगर तुम भी उसे मौका दोगी तो दोनों एक दूसरे के साथ खुश रहोगे।" वह मुँह लटकाते हुए बोली, "फिर भी कितना इंतजार यार ! सबका कोई ना कोई boyfriend है।" मुझे पता नही क्या सूझा कि मेरा जबान फिसल गया, "यार अगर इतना कमी खल रहा है तो मुझे ही अपना boyfriend मान लो..." वह मुझे अचानक से बड़ी बड़ी आंखों से घूरि, मैं दिमाग हिल गया, ये मेरे मुँह से क्या निकल गया, मैंने situation को संभालते हुए बोला, "यार बस temporary ले लिए ही, बस दिल को दिलासा देने के लिए, जब तक कोई मिल ना जाए। ताकि ऐसे तुम्हे कमी ना खले। फिर जब कोई मिल जाए तो मुझे छोड़ने की भी बात कहाँ से आएगी, यह तो बस एक झूठ ही होगा। जो अपने दिल को बुद्धू बनाकर खुश रखने के लिए उससे बोल रही होगी। तुम खुश रहोगी, तुम्हारे चेहरे में मुझे हमेशा smile रहेगा।" वह धीरे से फुसफुसाई, "तू बेटा कुँवारा ही मरेगा।" मैंने पूछा, "क्या कहा तुमने ? मैंने ठीक से सुना नहीं।" वह मुँह बना दी, और बोली, "तुम मेरी खुशी के लिए कुछ भी करेगा ?" मैंने कहा, "हाँ, अपने दोस्ती के हद तक।" फिर मेरा नींद खुला। मेरे दिल को अजीब सा सुकून महसूस हो रहा था। मेरा दिल खुश था, और चेहरा भी। काफी लंबा समय तक। जब तक कि उस दिन मेरा मन किसी और काम में नही उलझा। मैं नींद से उठकर सोंच रहा था। यार मैं सच में इतना सरीफ हूँ ? जो नींद, यानी कि अपने मदहोशी में भी अपना होश ना खोऊँ ! मैंने देखा था, जब वह मुझे गुस्सा कर अपनी बड़ी बड़ी आँखों से देखी थी और मुझे डर लगा था, उसके आँखों मे गुस्सा नही बल्कि चमक था। उसके बाद मुझे कईयों ने कहा, "कृष्णा, तुम बहुत अच्छा है। तुम भले ही बस दोस्त रहो, पर तुम्हें अपने life में हमेशा होने की दिल को ख़्वाहिश होती है।" Not only boys, but girls also told me this sentence. शायद मैं ऐसा सच में हूँ। क्या पता !
अगर मुझसे कोई पूछे कि, "क्या मैं इतना अच्छा हूँ ?" मैं कहूँगा कि नहीं। मैंने ऐसी कई गलतियाँ की है, जो मुझे नही करनी चाहिए। मैं हमेशा कोई ना कोई गलती करता ही रहता हूँ। मैंने अपने dreams में कई ऐसे गलत काम किये हैं जो मुझे कभी नहीं करनी चाहिए। कई बार खुद के अंदर की बुराइयों को बाहर निकलते हुए देखा हूँ। सबसे ज्यादा अपने अंदर के गुस्से को, नफरत को, जलन को, और भी छोटे बड़े कई सारे। नहीं, मैं अच्छा बिल्कुल नही हूँ। मेरे अंदर शैतान बनने की चाहत होती है। मेरे अंदर गलत कामों को करने की इक्षा जगती है। ऐसे नही जिन्हें कानून अपराध मानता हैं, बल्कि वैसे बड़े बड़े गलत काम जिन्हें धार्मिक ग्रंथो में गुनाह माना गया है। मैं अच्छा नहीं हूँ। बल्कि मैं अच्छा बनने की कोशिश करता हूँ। इक्षाएँ मेरे मन में भी बहुत उठती है, पर मैं अपने मन में उठ रहे गलत इक्षाओं को दबाने की कोशिश करता हूँ। मैं डरता हूँ कि मुझसे कुछ गलत ना हो जाए और बस इसलिए मैं शराब और शबाब से दूर रहने की कोशिश करता हूँ। ताकि कभी किसी रोज अपनी मदहोशी में अपना होश ना खो दूँ।

14th December, 2019 A.D.

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