निराश दिल, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

Monday, November 21, 2016 0 Comments
_निराश दिल_
(अरमानों के टूटने के कारण निराशा में लिखे)
कृष्ण कुणाल की लिखी कविता


_निराश दिल_

देखते-देखते उसको,
दिल मेरा अचानक रो गया ।
मेरे पास आती हुई खुशियाँ,
न जाने कहाँ तो खो गया ।।

बेदर्द जज्बात वो मेरे,
अब तुमको बताऊं मै कैसे ।
हर रोज जिस फूल की तारीफ करता था,
उसे चूरा लिया हो कोई जैसे ।।

दोस्ती करने की जिनसे हसरत थी,
वो सामने आये और चले गये ।
सब्र किया फल मिठा होगा,
मेरे तो रखे-रखे ही सड़ गये ।।

दिल मे समाये लोग मेरें,
किस्मत में कभी भी आते ना ।
टाँग अड़ाते लोग मेरे,
रास्ते से कभी भी जाते ना ।।

क्या करुँ अगर वो अच्छा हैं,
चल मान लिया उसकी कोई गलती नही ।
अगर हर जगह वो टाँग ना अड़ाता,
तो नफरत की आग कभी जलती नही ।।

चल फिक्र ना कर मेरे हाव-भाव से,
किसी को कुछ नही करूँगा ।
लालच आता है उसे देख कर,
कोशिश करूँगा, दोनो से दूर रहूँगा ।।

-AnAlone Krishna.
21/11/2016

When I was so hungry after enjoying friend's party. I gone for last plate. And suddenly that was taken by that person, who always teased me when we were classmates. You know what thought would came then.

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