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  •क्या एक चीज सोचने वाली बात नहीं हैं... जितने भी आविस्कार किए गए, जिनका हम आज दुष्परिणाम झेल रहे है, उनके अंदर कुछ नया करने की तमन्ना थी ...

क्यूँ खफा है तू औरों से ऐ मुसाफ़िर , तेरी मंजिल कहीं और है, उनकी कहीं और । सूरज रात को रौशन नहीं करेगा, और परिंदों को अपना आशियाना चाहिए...

  •my thought for World's Women's Day मैं थोड़ा अतीत के बारे में सोच रहा था । जिसमें की हमने कभी रानी लक्ष्मीबाई, पद्मिनी, इंद्रा गाँ...
*बता जरा, मैं फिर हूँ बहका*, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

*बता जरा, मैं फिर हूँ बहका*, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

*बता जरा, मैं फिर हूँ बहका* (एक बार दिल टूटने के बाद फिर से किसी के पीछे बहकने लगने के एहसास में लिखा हुआ) कृष्ण कुणाल की लिखी कविता- ...

  Duniya me maine ab tak jo samjha usse yah lagta hai ki, log jo modern/pariwartanwaadi vichar dhara ke hote hai wo hamesha badlav ko accept...

  If l go to loneliness and anyone take me out from that, I shall become happy and shall enjoy life better than earlier. After that if I...

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