•my thought for World's Women's Day
मैं थोड़ा अतीत के बारे में सोच रहा था । जिसमें की हमने कभी रानी लक्ष्मीबाई, पद्मिनी, इंद्रा गाँधी, Mother Teresa के बारे में पढ़ा था। मैंने तो नहीं पढ़ा कि इन्होंने नारी सम्मान की रक्षा के लिए कोई लड़ाई या आंदोलन किया हो। फिर भी हम इन्हें मिसाल के रूप में याद करते हैं। यह सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि पुरुषों के लिए भी मिसाल है। इन्होंने कभी अपना हक पाने के लिए लड़ाई नहीं लड़ा बल्कि इन्हे जो करने का मन किया इन्होंने वो किया। किसी ने स्वतंत्रता के लिए लड़ाई में अपना भागीदारी दिया, किसी ने राज्य के सम्मान की रक्षा के लिए जौहर किया, किसी ने राजनीति और नेतृत्व करने का भार सँभाला, तो किसी ने खेलकुद में कीर्ति हासिल किया। तो हम इन्हें सम्मान देते हैं।
मेरे हिसाब से जब तक कोई बच्चों की तरह जिद्द करते हुए अपना सम्मान पाना चाहेगा, चाहे वो लड़की हो या लड़का, कभी नहीं पा सकता। आप ही सोचिए जिसकी मानसिकता बचकाने जैसी हो तो हम उसके हाथों में power कैसे सौंप सकते हैं ! जब वे हमारे साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलना शुरू कर दे, जिम्मेदारियों को संभालना शुरू कर दे तो हम क्यूँ उनका सम्मान नहीं करेंगे ?
इसके लिए सबसे पहले महिला हो या पुरुष अपना सम्मान खुद करना सीखे, तो लोग आज नहीं तो कल सम्मान करना जरूर शुरू करेंगे। जो व्यक्ति खुद का सम्मान नहीं कर सकता वो दूसरों से respect का aspect कैसे कर सकता है !
-AnAlone Krishna
8th March, 2018
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