Day 7 | Diary of AnAlone Krishna

Sunday, December 08, 2019 0 Comments
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_____Day 7_____

"उसे आगे बढ़ना अच्छा लगता है", यह poem मैंने खुद को dedicate किया है, किसी और की perspective से खुद को देखता हुआ।
मुझे कभी एक बहुत ही अच्छे दोस्त के अपने life से से उसकी कमी खलती थी। यूँ तो उसके जाने के बाद मेरे कई नए दोस्त बने, लेकिन उसकी कमी कभी पूरा नही हुआ। मुझे हमेशा किसी ऐसे इंसान की कमी होती थी जो कि मुझे समझे। इस तरह से मानो कि किसी एक लम्हें में मैं ठहरा हुआ था। मैं चाह कर भी ठीक से आगे बढ़ नही पा रहा था। दिल को ख़्वाहिश होती थी कि काश उसके साथ दो पल दोबारा बिताने को मिले। ज्यादा नही, बस कम से कम 5-10 min, फिर शायद मुझे आगे बढ़ने में कोई problem नहीं होता। वैसे तो यह मेरी wish थी मगर इसका मुझे बिल्कुल भी expectation नहीं था कि ऐसा भी कभी होगा। पर यह हुआ। वह लौट आई, और सिर्फ 5-10min के hi/hello के लिए नहीं बल्कि उससे ज्यादा ही समय के लिए। काफी ज्यादा समय के लिए। क्योंकि यह चीज मेरे लिए unexpected था, जितना wish किया था उससे बहुत ज्यादा था, वो अहसास, वो अंदर से खुशी मुझसे रहा नही गया। मुझे समझ नही आ रहा था कि क्या करूँ। तो उस वक़्त मैंने अपने उन अहसासों को समझते हुए अपनी poem "शाम की लालिमा" (https://krishnakunal.blogspot.com/2018/09/blog-post.html) को लिखा।
अब क्योंकि यह unexpected था, तो मेरे पास इस situation के लिए पहले से कोई plan नहीं था। जिससे problems इसके आगे शुरू हो गई। मेरा life का track एक अलग direction पे जा रहा था, उसके life का track एक अलग direction पे जा रहा था। तो इसलिए दोनो के लिए similar नहीं था। ना ही हो सकती थी। हम अगर कभी चाहे भी तो एक साथ पहले की तरह कभी नही रह सकते। वो जो है, मैं जो हूँ, हमारी responsibility, duty हमें ज्यादा देर तक साथ नही रख सकती थी। पर दिल की ख़्वाहिश हो रही थी कि जितना पल दोबारा साथ बिताने को मिल रहा है, कम से कम उसे मैं जी लूँ। सबसे बड़ी बात यह थी कि मैं इस situation को किसी को बता भी नही सकता था और ना ही किसी को समझा सकता था। तो उस वक़्त मैंने यह decision लिया कि ना ही उसे ignore करूँगा, जिससे वह hurt हो और ना ही कोई गलतफहमी में expectation पालकर आगे बढूंगा। मगर खुद को काबू कर पाना इतना तो आसान होता नहीं। उस वक़्त मैंने खुद के situation को जितना समझा उससे मैंने अपनी poem, "अधूरी ख़्वाहिश" (https://krishnakunal.blogspot.com/2019/06/blog-post.html) को लिखा।
Life doesn't give second chance. जब तक situation हमारे अनुकूल था। एक दूसरे को time दिए। But अब समय आ गया था कि हमारे रास्ते फिर से शायद अलग हो जाए। इसमें situation में खुद को heartless बनाना पड़ता है। अगर आपके दोस्त आपको समझते हो तो, आपको वो माफ कर देंगे और अगर ना समझे तो जिंदगी भर के लिए उनके नजरों में गुनाहगार बन के रह जाओगे। तो यह जो poem है, "उसे आगे बढ़ना अच्छा लगता है" उसे मैंने लिखा उसके नज़रिए से ख़ुद को देखते हुए। मुझे ऐसा लगता है कि वह मुझे इस हद तक समझती है, और wish भी करूँगा कि वह मुझे समझे हो। अगर वह नहीं भी समझती हो तो कोई बात नही, मैं खुद को समझता हूँ ना।

7th December, 2019 A.D.

●"उसे आगे बढ़ना अच्छा लगता है"
(किसी को खोने के गम में हताश बैठे युवक के जिंदगी उसके वापस लौट आने पर अनदेखा करके आगे बढ़ने के अहसास के साथ) -कृष्ण कुणाल की कलम से

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