Day 6 | Diary of AnAlone Krishna

Saturday, December 07, 2019 0 Comments
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_____Day 6_____

कई दोस्त मुझसे कहते हैं कि मैं उनके लिए भाई जैसा हूं। मेरी मां मुझसे कहती है कि अगर दिल से निभाओ तो किसी को भी अपना ना बना सकते हो। अंकल मुझसे कहते हैं कि रिश्ते दिमाग से नहीं दिल से निभाए जाते हैं। इसमें अपना और पराया का भेद नहीं करना चाहिए। मगर साथ ही साथ कई लोगों से मैंने यह भी सुना है कि अपने अपने होते हैं और पराए पराए। मेरे कोई अपने भाई बहन नहीं है, लेकिन जितनो से निभाने का रिश्ता है ना, सभी अपने जैसे ही हैं। फिर भी जब कोई बोलता है ना, अपना भाई अपना होता है, अपनी बहन अपनी होती है, मुझे बहुत दुख होता है। आज सुबह सुबह मैंने एक dream देखा जिसमें मैं bag लिए school से घर जा रहा हूं। और मेरे साथ मेरे भाई बहन भी है। उनके साथ खेलते कूदते। मेरे जो भी भाई बहन हैं, दोस्त हैं, दिल से निभाते हैं। सभी मेरे अपने हैं। लेकिन जब लोग इस चीज का ताना देते हैं ना, कमी तो महसूस होती ही है। इस चीज की कमी होती है कि मैं उनके लिए चाहे कुछ भी करना चाहूँ ना, लेकिन एक limit तो होती ही है। जिसके आगे मैं नहीं बढ़ सकता। दोस्तों के साथ साथ तो रह सकता हूं, लेकिन हमेशा साथ दे नहीं सकता। जो भी भाई बहन है, उन्हें सलाह तो दे सकता हूं, उन्हें राह भी दिखा सकता हूं, लेकिन अगर वो कुछ गलत कर रहे हो ना, मैं उन्हें दबा नहीं सकता। मेरी एक हद होती है और बस इसी हद के चलते मुझे भी कमी महसूस होती है। कई लोग है जो अक्सर मुझे कहते हैं कि तुम अपने नाम के पहले AnAlone लिखते हो, तुम्हारे मां बाप नहीं है क्या..! मैं भी मानता हूं, वह है और मुझे बहुत प्यार करते हैं। लेकिन फिर भी जो कमी महसूस होती है ना, उनके होने के बावजूद वह महसूस होती ही है। मैं सबके लिए कुछ भी कर सकता हूं, लेकिन वह जो कुछ भी है ना, उसकी भी एक हद होती है। मैं हर चीज नहीं कर सकता। मैं उनके life में एक guest की तरह हूं। और यह हमेशा मुझे महसूस होता है। मुझे इस बात का कमी हमेशा होता है की मेरे गलतियों को सुधारने के लिए कोई मेरा बड़ा भाई नहीं है। मुझे दुनिया के डर से बचाने के लिए कोई बहन नहीं है। यह कमी तो होती है। मैं हर पल कुछ ऐसा महसूस करता हूं कि मैं अगर भीड़ में भी रहूं ना तो फिर भी उस भीड़ में भी खुद को अकेला महसूस करूंगा। मुझे भीड़ भी पसंद नहीं आता। जश्न पसंद नहीं आता। कमी मुझे भी इस बात की होती है कि कोई तो हो जो मुझे समझे। जिससे मैं खुलकर अपने दिल की सारी बातें कर सकूं। जब मुझे कभी रोना हो तो उसके कंधे पर सर रखकर रो सकूं। मैं जब उदास होऊँ तो बिना कहे वह आकर मुझे उस उदासी से निकाले। सिर्फ care करना/ परवाह करना, यह तो कोई भी कर सकता है। यह भाव किसी को भी होता है। लेकिन किस हद तक कोई किसी के लिए कुछ कर सकता है, वह उसके choice पर depend करता है। कि वह कितना किसके लिए कुछ करना चाहता है। इसलिए मेरा life का एक ही फंडा है कि जो कोई भी care या परवाह कर रहा हो ना, थोड़ी सी भी, तो उसकी कद्र करो। क्योंकि इतनी भी करने के लिए.., सब आगे नही आ सकते। मुझे राह दिखाने के लिए मेरे मम्मी पापा तो हैं, लेकिन मेरे साथ चलने के लिए मेरे साथ कोई नहीं है। जो दोस्त हैं उनके life की अपनी problems होती है, उन्हें उन problems को देखना है। और जो मेरे भाई बहन हैं, उनके life में भी अपनी problems है, जिसके चलते वह हमेशा मेरे लिए खड़ा नहीं हो सकते। कोई हमेशा मेरा साथ नहीं दे सकता, मुझे इसकी कमी होती है। किसी का साथ देना ना देना, वह सबकी अपनी choice होती है। मगर हालात किसी के कुछ यूँ हो कि कोई हमेशा साथ दे सके, वह हालात भी नही है। और हां, इस चीज की कमी तो मुझे होती है। हमेशा होती है।

4th December, 2019 A.D.

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