Day 10 | Diary of AnAlone Krishna

Wednesday, December 18, 2019 0 Comments
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_____Day 10_____

कईयों ने मुझसे पूछा है, आखिर कौन थी वह लड़की जिसके याद में मैं poetry करता हूँ। जिसको dedicate मैं अपनी हर एक poetry करता हूँ। मैं सबको समझाते-समझाते थक गया हूँ, कि यार वैसी कोई लड़की मेरे life में नहीं रही कभी। मैं तो बस जो feel और experience करता हूँ, खुद से या किसी से भी, उन्हें ही express करने के लिए poetry करता हूँ। पर कोई है कि मानते ही नही। वो कहते है कि वो मान ही नही सकते कि कोई खुद किसी चीज को बिना जिये इस हद तक समझ सकता है कि वैसी poetry कर सके जैसा मैं poetry करता हूँ। तो क्या वो सब जीने के लिए किसी लड़की से प्यार होना जरूरी है ? मैं कहूँगा कि बिल्कुल नहीं। कुछ किस्से हैं ऐसे जो मुझे वैसी feelings को experience करवाते गए जो शायद लोग relationship में रहकर भी समझ नहीं पाते हैं।
मेरा एक दोस्त हैं। वैसे तो मेरे बहुत सारे दोस्त हैं, पर मैं इस वक़्त खास उस दोस्त के बारे में लिख रहा हूँ जिसके साथ अगर मेरी कभी बहस हो और मेरी माँ को पूछा जाए कि सही कौन है और गलत कौन तो शायद मेरी माँ मुझसे ज्यादा उस पर भरोसा करेगी और उसे अहमियत देंगी। हाँ, जलन तो होती है, कि मेरी माँ मुझसे ज्यादा किसी और को अहमियत कैसे दे सकती है। मगर मुझे अपने जलन के साथ-साथ मेरी माँ का मुझे लेकर प्यार भी महसूस होता है कि वह मेरे दोस्त पर इतना भरोसा करती है कि वह मुझे कभी गलत राह नही दिखाएगा और मेरा साथ कभी नही छोड़ेगा। मैं खुद को हारा हुआ महसूस करता हूँ कि मैं अपने किसी दोस्त के life में ऐसी जगह कभी नही बना सका। चाहत, jealously, feelings, understandings, सभी तो है इसमें experience करने के लिए। फिर इसके लिए कभी किसी लड़की से आशिक़ी करने कि क्या जरूरत थी! इसलिए मैंने इसे कभी जरूरी भी नही समझा।
मैं अपने उस दोस्त के साथ रहता था कभी, जब हम दोनों पढ़ाई किया करते थे। उसका subject ही ऐसा था कि उसे field में work करके experience लेना होता था। मेरा जब एक बार birthday आया, उसने उस दिन मुझे वक़्त देने का plan बनाया। हम party करने वाले थे। मगर दोपहर को उसका urgently call आ गया, और उसका जाना important था। उसने जल्दी आने का promise किया, और कुछ special बनाकर खा लेने को कहा। मैंने शाम में उसे call लगाकर आने का समय पूछा, और उसके हिसाब से लगभग आने के time तक पनीर बनाया। जब आधा घंटे late हुआ तो मैंने उसे call किया, उसने कहा कि "urgently Boss का घर जाना पड़ रहा है, तुम खा लेना और मेरे लिए थोड़ा सा रख देना।" मैंने सोंचा कोई बात नहीं थोड़ा late होगा तो late ही सही, हम साथ खाएँगे। पर रात 11 बजे तक नहीं आया तो मैंने फिर उसे call किया। उसने कहाँ कि Boss के घरवाले जमाष्टमी का प्रशाद लिए बगैर निकलने नहीं दे रहे, बस 10-15 min में निकल जाएगा। मैंने 12 बजे तक, साढ़े 12 बजे तक wait किया, वह नही आया। फिर मुझे भूख बर्दाश्त नही होने लगा तो मैं खाना गरम करके खाने बैठा। जो लोग किसी का इंतजार कभी इस तरह किये होंगे उन्हें पता होगा कि हर इंतजार का फल मीठा नही होता, इसमे taste चला जाता है। मुझे बिकुल भी अच्छा नही लग रहा था। खाने का मन भी नही कर रहा था। मगर भूख बहुत तेज लगी थी ना, तो खाना पड़ रहा था। जब हम बाहर में रहते हो तो हमें care करने वाला कोई नहीं होता, हमें खुद की care खुद से ही करनी होती है। कोई हमें पूछने वाला नहीं होता कि "मेले बाबू ने थाना थाया...?" मैं बेमन से खाना खा ही रहा था कि उसका call आया, "Boss जबरदस्ती खाना खिला दिए। 10 min में आ रहा हूँ, तुम gate खोल कर रखना।" उस वक़्त मन हुआ कि आधा खाना खाये plate को जोर से फेंक दूँ। लेकिन, जब हम बाहर में रहते हो तो हमें care करने वाला कोई नहीं होता, हमें खुद की care खुद से ही करनी होती है। कोई हमें पूछने वाला नहीं होता कि "मेले बाबू ने थाना थाया...?" मैंने अपने गुस्से को घोट कर खाना पूरा खा लिया। जब वह आया तो मैंने gate खोला और आके सीधा मैं सो गया। उसकी नजर कपड़े बदतले समय कड़ाही के पनीर पर पड़ी, उसने कहा, "I'm sorry यार, आज तुम्हें अपना समय दे नहीं पाया।" मैंने सीधा कहा, "कोई बात नहीं। मुझे नींद आ रही है, तुम भी सो जाओ।" चद्दर के नीचे बंद आँखों के ऊपर पलकों से छलकते आँसू तो थे, मगर उसे पोंछने वाला कौन था ? अगर मेरी सिसकियों को गलती से सुन लेता वह और अगर पूछ देता कि "क्यूँ रो रहे हो ?" तो जब मैं बिखरता तो मुझे संभालने वाला कौन था ? वहाँ पर...
Feelings को experience करने और relationship को समझने के लिए किसी से आशिक़ी करने की जरूरत नहीं होती। बस अगर खुद में वह छमता हो तो वह किसी भी ralationship को ईमानदारी से निभाने के दौरान ये सब हम समझ सकते है। मैं दोस्ती में ही इतने बार टूटा हूँ कि कभी किसी से आशिक़ी करने की हिम्मत नहीं हुई। मैं शुरुआत में अपने जिन दोस्तो के साथ रहा करता था, तब मुझसे ऐसी ऐसी गलतियाँ हुई जिसके कारण मैं कभी उनसे ठीक से नज़र नही मिला पाया। जिसके कारण मुझे उनको छोड़ना ही सही लगा, और खुद को उनसे दूर कर लिया।

18th December, 2019 A.D.

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