क्या दोबारा फिर कभी इश्क़ होगा !
(पुराने इश्क़ के अहसासों का दोबारा इश्क़ होने देने से रोकने के अहसास के साथ)
कृष्ण कुणाल की लिखी कविता
क्या दोबारा फिर कभी इश्क़ होगा !
फिर जब महकेगा ये समां,
याद आयेगा यह महका था पहले कभी।
फिर कभी बहकूँगा मैं,
याद आयेगा मैं बहका था पहले भी कभी।
फिर कभी खूबसूरत जो लगेगा कोई नज़ारा,
याद आयेगा कोई खूबसूरत लगता था पहले भी कभी।
फिर कभी जो अपने आप कदम
चलने लगेंगे मेरे किसी की ओर,
ठीक वैसे ही जैसे चलने लगते थे
पहले भी कभी किसी की ओर अपने आप ही,
याद आयेगा यह कुछ भी नया नहीं है
जो पहली बार हो रहा है।
यह जो अहसास मैंने जी है पहले भी कभी,
क्या याद नहीं दिलाएगा इन अहसासों के दोबारा
शुरू होने के साथ ही कि कुछ भी नया नहीं हैं ?
आँखों को नजरों का खूबसूरत लगना,
साँसों को बहारों का महका-महका लगना,
दिल का फिर से बहका-बहका लगना,
यह कुछ भी नया नहीं है जो पहली बार हो रहा है।
अब लिखना भी चाहता हूँ किसी को कुछ
तो वो अहसासें मेरे हाँथों को रोक लेती है।
अब अगर कहना भी चाहूँ किसी को कुछ
तो मुझे सही शब्द नहीं मिलते कहने को।
दिल को अगर भाने भी लगता है किसी का साथ,
तो मेरे कदम नहीं उठते फिर किसी के ओर जाने को।
ख़ैर, ख़ैरियत की दुआ माँगते हैं अब मेरी
मेरी फिक्र करने वाले जब दुआ माँगते हैं।
कि मैं फिर से महकू-बहकू-चहकू दोबारा
दोबारा फिर से किसी से मिलने के बाद।
पर फिर से मेरा दिल खिलेगा क्या !
क्या दोबारा फिर कभी इश्क़ होगा !!
written on 5th October, 2022 A.D
published on 30th January, 2023 A.D.
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