पहली दिल्लगी - दिशा प्यार की ,कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

Sunday, June 18, 2017 0 Comments
॥ पहली दिल्लगी ॥ 0  • 1  • 2  • 3 • 4  • 5 • 6  • 7 

• पहली दिल्लगी - दिशा प्यार की •

(प्यार में एक दूसरे के करीब आ रहे अहसास के साथ)
कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

*पहली दिल्लगी-दिशा प्यार की*

ऐ आसमां पर बैठा खुदा,
मुझको बस तू इतना बता ।
एक बहुत ही नायाब नूर के जैसे,
कैसे तूने ली हूर बना ?

कौन भला अब रोकेगा खुद को,
हर्ष-उल्लास सब है उसमें ।
ऐ जिन्दगी, क्या मै झूठ बोल रहा,
दिखता मुझको रब है उसमें ।।

चाँद भी ला दूँ,
और तारें भी ला दूँ ।
दुनियाँ में है जितनी खुशियाँ,
वो सारे भी ला दूँ ।।
वो बस झूम जाये
जो मौसम के मिजाज से ।
मैं गरमी की धूप में,
बहारें भी ला दूँ ।।

कैसा है ये साथ उसका ?
उसकी हर बात मुझे अब भाता है ।
उसकी हर एक ख्वाहीश के लिए,
दिल हद से गुजर जाता है ।
ऐ जिन्दगी बस ईतना बता दे मुझको,
कि वह बन गई है अब मेरी मँजिल ।
मै तुझको सोचू या उसको सोचू,
यह मुझको समझ नही आता है ।।

है कितनी हसीन ये उसकी नसीहत,
मैं वो करूँ जो तू चाहता है ।
ऐ जिन्दगी, अब मैं जान गया हूँ ।
मैं उसका हो जाऊँ, तू यही चाहता है ।।

-AnAlone Krishna.
18/06/2017
This is expand form of last four lines of 2nd para. of my poem, 'पहली दिल्लगी-शुरूआत से अंत' ।

इसके हर एक stage के अहसास के साथ लिखे गए कविता को पढ़ने के  लिए blog के page 'पहली दिल्लगी'  में जाएं। Link- http://krishnakunal.blogspot.com/p/poetry_11.html




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