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आईने ढूँढ़ रहा हूँ मैं... | कृष्ण कुणाल की कविता

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● आईने ढूँढ़ रहा हूँ मैं... ● (जब मैं अपनी असफलताओं से हारा हुआ महसूस करने, और खुद को कैसे हताश होने से बचाया, या यूँ कहूँ तो खुद को संभालकर ...

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