"हर इंसान का अपना अलग नज़रिया होता है। तुम लोगों के सामने चाहे कितने ही उदाहरण रखो, वो मानेंगे तो वही जो उन्हें मानना है। मैं अगर उन्हें अपना नज़रिया मानने को थोप नहीं सकता, तो कोई मुझेपर भी अपनी मान्यता नहीं थोप सकता है। दिक्कत तो तब आ जाती है जब हम यह कोशिश करने लगते हैं कि जो हम मानते है, सब वही माने।
मैं नास्तिक रहूँ या agnostic, वो जो मानते है कि उनका ईश्वर है, उन्हें अगर मैं मनवाने की कोशिश करूँ कि उनकी बहुत सारी मान्यताएं बस कलपना है; तो फिर मैं कैसे सही हूँ। मैं भी तो अपना सोच उनपर थोपने कि कोशिश ही कर रहा हूँ।
ठीक है, जिसको जो मानना है मानो यार ! जब लगे कि अपनी बात को साबित कर सकते हो, तुम तब आना मेरे पास। मुझे कोई interest नहीं है तुम्हें आस्तिक से नास्तिक बनाने में। तुम खोए रहो अपनी मान्यताओं में। मैं बस खुद पर काम करूंगा कि जो मैं सोचता हूँ, क्या वो सच में सच है; या यह मेरी कल्पना/भ्रम है। मुझे बस खुद पर काम करना है। तुम्हें गलत/सही साबित करने में मुझे अपनी ऊर्जा व्यर्थ नहीं करनी है।
20th June, 2026

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