Day 80 | Diary of AnAlone Krishna

Monday, September 08, 2025 0 Comments
__________Day 80__________

आज रात, in my dreams-
मैं कमरे में अपने कमरे में roommate के साथ था। मुझे गलियारे में किसी लड़की के चिल्लाने का आवाज सुनाई दिया। फिर दरवाजा खुलने का, किसी को पीटने का। उसके बाद अगले दरवाजे को खटखटाने का, फिर पीटने का। आवाज धीरे-धीरे करीब आ रहा था, और मुझे सुना-सुना सा लग रहा था। मैं सोच ही रहा था कि कहीं यह वही तो नहीं है, फिर मेरे दरवाजे में knock हुआ।

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मैं डर-डर कर दरवाजा खोला तो jeans और top में मेरे सामने वही खड़ी थी मेरे पिछले दिन की सपने वाली, height mere जितना, हमारी नज़र सीधी मिल रही थी। ना मेरी नजर झुकी हुई थी और ना गुस्से से देखने के लिए मेरे सामने माथा ऊपर करना पड़ रहा था। वह मुझे कुछ नहीं बोली, फिर मेरे सामने दूसरा दरवाजा खटखटा कर सामने वाले लड़के को बुरी तरह कूटी। फिर मेरी ओर घूमी। वह मुझे वही खड़ा देखी तो वह और गुस्सा हो गई, और मुझे बोली, "सुन बे चिलगोजे, तू मुझे थोड़ा बहुत पसंद है इसलिए तुझे कुछ बोली नहीं। अब सामने ऐसे खड़ा रहकर मेरा दिमाग और मत गरम कर, दरवाजा बंद कर और शांति से अंदर रह।"
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मैं अंदर दरवाजा बंद करके दीवार से अपना सिर पीट रहा हूँ! ऐसा मेरे साथ ही होना था!
जो लोग मुझे बाद में मिले वह नहीं जानते, वो नहीं जानते हैं। जो मुझे बचपन से जानते हैं, वो जानते हैं कि मुझे गुस्सा बहुत तेज आता है। पर मैं अपने गुस्से पे बहुत काम किया हूँ। जब हम emotionally weak होते है, खुशी और दर्द के पल में, तब हमारे emotions हमारे ऊपर हावी होते हैं। जब दर्द होता है, तकलीफ होता है, तो दिन सुकून चाहता है। जो नहीं मिलता है तो तड़प गुस्से में बदल जाता है। जो मुझे अपने खुशी, तकलीफ, गुस्से में करीब नहीं आने देगी, उसे जानने , समझने नहीं देगी, उसका weakness नहीं बनने देगी, मैं उसका mood swing/ठीक कैसे करूँगा ?

नाम आज भी पूछ नहीं पाया। ऐसे situation में नाम पूछने जाता क्या !
अब दोबारा सोने जा रहा हूँ। शायद mood ठीक होने के बाद वह वापस मुझसे मिलने मेरे सपने में आए।

-AnAlone Krishna
8th September 2025 A.D.

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