कुँए का मेंढ़क यह सोंचता है कि उसका कुँआ कितना बड़ा है। तालाब का मेंढ़क भी यह सोंचता है कि वह कितने बड़े तालाब में रहता है। फिर नदी में जाकर सब हैरान होते हैं कि नदी कितनी बड़ी है।
ठीक वैसे ही इस ब्रम्हाण्ड में मौजूद अनंत आकाशगंगाओं में से एक आकाशगंगा के अनंत सूर्यो में से हमारे एक सूर्य चारों ओर परिक्रमा कर रहे धरती के ऊपर तैरती कई महाद्वीपों में एक महाद्वीप का एक भूखंड हमारे देश के कई राज्यों, जिलों, शहरों, गाँवो, कस्बों में से एक छोटे से भाग में रहने वाला छोटा सा मनुष्य पूरी जिंदगी इस घमंड में जीता है कि वह कितना महान लोगों का वंशज है, महान समाज में रहने वाला, महान जाती से नाता रखने वाला, महान धर्म को मानने वाला, महान सभ्यता का धरोहर संभाले, महान संस्कृति को बचाने वाला, महान देश का महान नागरिक है।वह यह भूल जाता है कि उसकी उपस्थिति इस ब्रम्हाण्ड, आकाशगंगा, सौर-मण्डल, धरती, उप-महाद्वीप में एक तिनके के भी बराबर नहीं है। फिर भी वह अपनी पूरी जिंदगी इस घमंड में जीने की कोशिश करता है कि वह कितना महान और ख़ास है।
-AnAlone Krishna
31st March, 2023 A.D.
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