Day 5 | Diary of AnAlone Krishna

Saturday, November 30, 2019 0 Comments
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_____Day 5_____

आज सुबह सुबह मैं सपना देख रहा था। जैसे कि हमेशा देखता हूँ। आज फिर वही सपना देखा। बचपन का सीने में दबा वही डर जो मुझे आज तक डरा रहा है। मेरा school का time हो रहा हैं। मेरा नींद नहीं खुल रहा ठीक से। मेरे कपड़े नहीं मिल रहे हैं। मेरे bag में सारे किताबें नहीं है। मैं हड़बड़ी में हूँ कि कहीं late ना हो जाऊँ। School जाकर याद आता है कि मेरे dress सही नही है। class शुरू हुआ तो याद आया कि मैं homework करना भूल गया। मुझे भी assignment चाहिए, मुझे भी मौका मिलना चाहिए खुद को उम्मीदों पर खड़ा उतरने के लिए। लेकिन हमेशा की तरह मौका बस class के toppers को मिलेगा और मैं बस उनके लिए तालियां बजाऊँगा। मैंने अपने अंदर के उस डर को फिर से महसूस किया कि इस नफ़रत के वजह से कुछ गलत ना कर दूँ। Alarm बजा, मैंने घड़ी देखा, 6:30 हो रहे थे। मैं फिर सो गया। Call आया, मैंने नींद में अपने आँखे बंद किये हुए ही receive किया।
Call पर, " उठा...? कितनी देर में निकलना है?"
मैंने कहा, "आज नहीं। आज late हो गए। कल जाएँगे।"
"अरे गधा, 5:30 ही तो हो रहे हैं।"
मैं surprise हो गया, "क्या..!!"
मैंने आँखे खोला तो याद आया मैंने नींद में ही घड़ी देखा था।
यह कुछ चीजें थी कि जो मुझे डराती थी। इसलिए मेरे पास इससे लड़ने के उपाय थे। मैं बचपन से घड़ी में alarm लगाकर सोता था फिर भी दादी और मम्मी को रोज सोने से पहले बोल देता था कि मेरे लिए पानी गरम कर दे। कपड़े सोने से पहले देख कर hanger में टाँग दिया करता था। Homework complete करके रात में ही bag pack कर लिया करता। Late तो मैं बेशक़ फिर भी होता ही था। Dress up sense भी उसी का नतीजा है। Expectations और assignment का कुछ कर नही सकते थे, क्योंकि मैं एक scholar नहीं था। मगर सीखना अच्छा लगता था इसलिए as a sidekick रहना कभी शर्मिंदगी महसूस नहीं की। थोड़ा बहुत होता था। मगर सीखने के लिए कुछ भी... यूँ कहे तो मेरा पहला प्यार study ही था। उसको लेकर crush, means कि सीखने को लेकर.., उस समय ऐसा लगता था कि कुछ भी कर सकता था। किसी भी चीज को sacrifice कर सकता था।
अब क्योंकि मुझे यह सब फिर से याद आ रहा है, मेरा भटकना बंद। मुझे अपने लक्ष्य को target करने से कोई नही रोक सकता। अपने प्यार को पाने से कोई नही रोक सकता मुझे।
आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः |
बस अब मुझे इसपर काबू पाना है। अपने इस शत्रु पर विजय पाना है।

29th November, 2019 A.D.

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