हमारी एक दोस्त का भाई कभी उसे बोला था कि-
"क्या करोगी इतना पढ़ कर, अंत में तो आखिर तुम्हें घर पर चूल्हा चौका ही करना है !"
उस time मुझे भी लगा था कि कैसा पिछड़ा सोंच वाला लड़का है। But now I mean it. मैं देखा हूँ अपने साथ पढ़ने वाली लड़कियों को school, colleges, tutions, B.Ed. में...। वो हर चीज में हमसे प्रतिस्पर्धा की हमें पीछे छोड़कर आगे निकलने के लिए। कई जगह उनके हमसे बेहतर होने के कारण हमें मौका नहीं मिला। पर अंत में सबकुछ छोड़कर परिवार की खुशी के लिए किसी के घर में ब्याह कर अपना career छोड़ दी।
Now I understand, उसका भाई भी कभी किसी के future को लेकर hopeful होगा, और उसकी भी उम्मीदें टूटी होंगी।
आज मेरे जुबां पे भी same बात आते-आते रह जाती है। आखिर क्या फ़ायदा उनके इतना मेहनत का, हमें हर जगह नीचा दिखाने का जब उन्हें परिवार के लिए अपना ख्वाब और career को sacrifice ही करना है तो...।
समाज को यह नहीं सुनना है कि वह लड़के-लड़कियों में भेदभाव करता है इसीलिए वह उसे पढ़ने और हर जगह प्रतिस्पर्धा करने तो भेज देता है, पर सच तो यह है कि आज भी लगभग हर लड़की अपना ख्वाब और career छोड़ती है बस अपने परिवार की जिद्द के कारण।
-AnAlone Krishna
23rd February, 2026 A.D.
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