Day 86 | Diary of AnAlone Krishna

Tuesday, November 04, 2025 0 Comments

 __________Day 86__________


मेरा एक हिस्सा psychopath है। मैं जब school में था, तब मैं एक ख्वाब देखा करता था।
कि मैं खूब मेहनत करूंगा, खूब पैसे कमाऊंगा, फिर किसी आठ-दस floor building के top में एक party दूंगा। जिसमें हर उस इंसान को बुलाऊंगा, जो मुझसे बहुत उम्मीद दिखाते है। सभी को greed करूंगा, drink+dinner के बाद सभी के लिए dance arrange करूंगा। जब सभी dance में खोए होंगे, तब मैं किनारे पे आऊंगा, काले घने अंधेरे असमान में टिमटिमाते तारो को देखूंगा, नीचे जगमगाती शहर को नजरंदाज करके, अपनी बाँहे फैलाऊंगा ठंडी मद्धम हवा को महसूस करने के लिए, एक लंबी सांस लूंगा और कूद जाऊंगा। उनकी और किसी महत्वाकांक्षाओ से हमेशा के लिए मुक्ति के लिए।
मेरे उस हिस्से के ख्वाब में कभी wife/बच्चें/परिवार था ही नहीं।

मेरा वो हिस्सा आज भी उस किनारे पे खड़ा है, पीछे कुछ नहीं है, ना जगमगाती lights, ना drink+dinner table, ना कोई लोग। उसके पीछे अभी कुछ नहीं है, बस आगे सबकुछ है। पर मेरा वो हिस्सा आज भी उस किनारे पर है, अकेले खड़ा मायूस। क्योंकि उसका वह ख्वाब छोड़ कर मेरा एक दूसरा हिस्सा अपने ख्वाबों का एक दुनियां सजाया था, जब मैं college में था। जो नीचे अपने उस ख्वाब के राख के ढेर के बीच खड़ा है।


मेरे ये दो हिस्से वक्त में पीछे छूट गए है। मैं कोई और हूँ।

मैं मौत को बुरा नहीं अच्छा मानता हूँ। इस बेरहम जिंदगी से मुक्ति का।
इसलिए जब कोई मेरे पास अपने बुरे वक्त कोई उम्मीद लेकर आता है, तो मैं उन्हें निराश करता हूँ।

मेरे पास उम्मीद नहीं है, इसलिए मैं उन्हें यह नहीं दे सकता हूँ। पर मैं उन्हें मरने के लिए भी नहीं उकसा सकता हूँ, इसलिए मैं उनकी कोई मदद नहीं करता हूँ।

इस वजह से मैंने अपने कई बहुत ही अच्छे दोस्त खोए हैं। और आगे और भी खोऊँगा, अगर वो अपने इस हाल में मेरे पास मदद की उम्मीद लेकर आएंगे तो।

जो इस बात को नहीं जानते है, मतलब वो मुझे नहीं समझते है।

-AnAlone Krishna
28th October, 2025 A.D.

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My chat with one of my friends,

Me : Imagine करो-
एक खूबसूरत दुनियां को। जिसके बीच मैं खड़ा हूँ। जब दर्द और तड़प की आग में मेरा दिल जला, उस दुनियां में आग लग गई। और अब बचा है तो हर तरफ सिर्फ राख का ढेर। जिसमें अगर पानी की बूंदे पड़ती है, तो भाँप बनकर तपाती है। अगर हवा बहती है तो राख उड़कर शरीर से चिपक कर मुझे जलाती है। जहां नजर पड़ता है, काला राख का ढेर दिखता है। हवा गर्म और प्रदूषित, जिसमें सांस लेने में तकलीफ हो। धुंध से आसमान पूरा ढका हुआ। और मेरा एक हिस्सा(शख्सियत का) वहां है, उस राख के ढेर के बीच।
उसे अगर अब जीवन, संसार, रिश्तों का मोह छुए भी तो कैसे ? कैसे उसतक पहुंचे, धुंध और राख के बीच कहीं पर ?

She : Baap re
She : मुझे लगता है कि नजरिया बदलना चाहिए लेकिन इतना भी नहीं कि हर चीज में तार्किक ही सोच हो जाए

Me : पर ये तो Romantic है ☝🏻, और ये भी
Me : बस Dark Romantic है
Me : मेरा दूसरा हिस्सा जो 10 मंजिले छत पर खड़ा है, उसको छोड़कर आगे बढ़ने के लिए मेरा तीसरा हिस्सा आया था तो एक खूबसूरत ख्वाब सजाया है, वह तीसरा हिस्सा खुद अपने ख्वाबों के दुनियां में राख के ढेर में खड़ा है।
Me : और मुझे मेरे दूसरे हिस्से से सहानुभूति होती है, और तीसरे हिस्से पे हंसी आती है।

She : Kyu

Me : दूसरा हिस्सा लाचार खड़ा है, समझ में आता है कि उसका इंतजार पूरा नहीं हुआ।

लेकिन तीसरा हिस्सा इसलिए आगे आकर खूबसूरत दुनियां बना रहा था ताकि मेरे अंदर उसे, और उसके साथ जीने की ख्वाहिश जगा सके और दूसरे हिस्से से मेरा ध्यान भटका सके। और अब खुद राख के ढेर में खड़ा है।

She : तुमको पता है ये रील, ये किताबें हमारी उम्मीदें बढ़ा देती है और जब उम्मीदें पूरी नहीं होती तो एक मन की हत्या हो जाती है

Me : मुझमे जिन्दा रहती है, हार कर अंत के इंतजार में। जो next time याद दिलाती है कि ताकि मै वो गलती दोबारा ना करूं।
Me : मेरा पहला हिस्सा, मासूम था। उसके दिल में सभी के लिए प्यार था। वो सभी के अच्छा करना चाहता था, एक अच्छा समाज का निर्माण करना चाहता था। फ़िर अपने जीवन में पहली बार गांव का चुनाव देखा, समाज के हर उस इंसान को जिससे वह प्यार करता था, उनके लिए अच्छा करना चाहता था, उन्हें आपस में दुश्मनों की तरह सत्ता के लोभ में लड़ते हुए। उसका दिल टूट गया। वो हिस्सा लाश की तरह है।
Me : वो तब वापस आता है, जब मैं फिर से समाज के भले के बारे में सोचने लगता हूँ।
Me : और ध्यान देता है कि मैं लोगों से उम्मीद ना करूं कि वो मेरी कभी कद्र करेंगे। बिना किसी return credit के उम्मीद के, बस दिल की तसल्ली के लिए मुझे वह करने देता है। पर वो मुझे हमेशा रोकता है कि कहीं इस चक्कर में मै खुद को बर्बाद ना कर दूँ।
Me : तो, वो भी जिंदा ही है।

She : Hmm
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Chat on 2nd November, 2025
-Krishna Kunal

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