अगर आखरी दाँव जीतने के लिए शुरू में हारना पड़े, तो शौक से हारने में क्या बुराई है !
किसी दंगल में सामने वाला प्रतिद्वंदी शुरू में हारा हो, तो वह आखरी दाँव में जी जान लगाएगा जीतने की।
मगर वही अगर आप हारे और वो जीता हो, तो वह confident होगा कि वह आखरी दाँव भी जीत ही जायेगा।
यही तो मौका होता है, सामने वाले से बेहतर करने का।
तो अगर सामने वाले को यह गलतफहमी दिलाने के लिए हारना पड़े, तो शौक से हारने में क्या बुराई है !
"जीतने का एक मूल मंत्र यह भी है कि, कभी सामने वाले को उसका full potential use मत करने दो।"
3rd March, 2022 A.D.
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