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Day 25: Specially for youngsters | Diary of AnAlone Krishna

 _________Day 25__________

Specially for youngsters,
किसी पौराणिक कथा का कोई पात्र था, बहुत ही मर्यादित और पुरुषों में उत्तम चरित्र का. वह किसी राजकुल से भी संबंध रखता था। उसने अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिए खुद को 14 वर्षों के लिए वनवास दिया था। Whenever he banished himself for 14 years, his wife and younger brother also leaved the palace with him for live with him in the Jungle untill he should returned. वनवास में रहने के दौरान एक राक्षस ने उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया। चलो हम यह बात मान लेते हैं कि अपने पति धर्म का पालन करने के लिए उसने सौ योजन समुद्र को पार करके उस राक्षस को मार गिराया था और अपनी पत्नी को उसके बंधन से मुक्त किया था। परंतु उसने अपनी पत्नी को अपनाने से पूर्व समाज के द्वारा उसकी पत्नी के चरित्र पर उठने वाले सवालों के जवाब में उसके पतिव्रता होने की अग्निपरीक्षा भी ली थी। उसके पश्चात जब वह 14 वर्ष पूरा करके वापस अपने राज्य लौटकर अपने सिंहासन पर बैठा, अपने राजधर्म का पालन करने के लिए अपनी गर्भवती पत्नी का त्याग किया। उसने अपनी पत्नी को रात के अंधेरे में छल से वन में मरने के लिए अकेले छोड़ दिया।
खैर ये सब तो पौराणिक कहानियाँ हैं। ये सभी हमारे जीवन में सीख दे सके इसलिए हमें यह सुनाई जाती है। हर बेटे को यह कहा जाता है कि उसके जैसा आज्ञाकारी बेटा बनो, स्त्रियाँ उसके जैसे पति की मन में कामना करती है जो अपनी पत्नी को बचाने के लिए सौ योजन समुद्र पार कर गया था। हमें उसके जैसा मर्यादित चरित्र वाले व्यक्ति बनने की प्रेरणा दी जाती है जो अपने परिवार और कुल के सम्मान, रीति, और परंपराओं को बचाने के लिए किसी भी परिस्थिति में अडिग रहे। मेरे मन में कुछ सवाल आज के समाज को देखने के बाद बहुत मुझे परेशान करते हैं, जो मैं आप सभी युवाओं जो कि अभी तक अविवाहित हूँ, उनसे मैं पूछना चाहता हूँ।
To girls- अगर तुम्हारा कोई past रहा है, एक या उससे अधिक, जो बेशक बाद में तुम्हारी immaturity की गलती साबित हुई, लेकिन उस वक़्त तुम उससे बहुत ज्यादा emotionally attached थी। बेशक़ बेइंतहां इश्क़ होने के बावजूद, जो लगभग हर एक teenager का किसी ना किसी से हो ही जाता है, भले कोई इसे accept करता है और कोई नहीं कर पाता है, इसके बावजूद तुमने अपनी मर्यादा कभी नहीं लांघी हो। तो क्या तुम अपनी शादी से पहले इस बात को अपने होने वाले life partner के सामने accept कर सकती हो ? क्या लगता है कि वह इसके बाद तुम्हारे character के बारे में क्या सोंचेगा ?
To boys- जैसा कि समाज कई सारे उल्टे-सीधे बातें दूसरों के बारे में बनाता रहता है, अगर तुम्हारी life partner के बारे में कुछ गलत बात तुम शादी या शादी के बाद या शादी से पहले कहीं से यह सुनते हो या सुनने को ना भी मिले, या वह खुद इस बात को accept करे, कि उसका तुमसे पहले भी किसी से relationship था। इसका तुम्हारे मानसिकता पर क्या असर पड़ेगा ? क्या तुम उसके चरित्र पर यह भरोसा कर सकते हो कि वह अपनी मर्यादा नहीं लांघी होगी ?
To girls- चलो यह बात मान लिया कि एक बार अगर शादी fixed हो गई तो इस बात को reason बताकर वह शादी नहीं तोड़ सकता नहीं तो उसके सोंच पर सवाल उठेगा। लेकिन क्या वह इस बात से प्रभावित ना होकर तुमसे respectfully तुम्हें treat करेगा ?
To boys- क्या तुम इसके बाद भी अपनी wife को उतनी आजादी और reapect दोगे जितना खुद को देते हो ? उसके सारे पुराने friends को छुड़वाने के लिए उसका contact no. change तो नहीं करवाओगे ना ? वह अपने किसी ex से social media के जरिए बात ना करें इसका ध्यान रखने के लिए उसके सारे social media accounts के passwords तो नहीं लोगे ना ? फिर भी अपने मन को ना समझा पाने पर उससे बिना पूछे उसके social media accounts के passwords change और id deactivate तो नहीं करोगे ना..?
To girls- क्या लगता है वह खुद को क्यूँ नहीं समझा पाता है या पाएगा ? वह ऐसी मानसिकता वाला person है इसलिए या उसे नहीं पता कि अगर समाज ऐसी उल्टी-सीधी बातें करेगी तो वह उसका जवाब कैसे दें ? क्या उस मर्यादा-पुरुषोत्तम चरित्र वाले व्यक्ति के जैसा अपना पति पाकर जिसने अपने कुल, समाज, राजधर्म में विवश होकर अपनी निर्दोष पत्नी का त्याग किया था, आप सच में सुखी रह सकती हो ?
To boys- इतना अच्छे से एक दूसरे को जानने, समझने, प्रेम करने के बावजूद उसकी अग्निपरीक्षा लेने के बाद भी समाज की बातों को सोंचकर आप भी अपनी पत्नी का त्याग कर दोगे ? या आप अपनी पत्नी के support में समाज की बातों का सामना करने के लिए अपनी पत्नी का साथ देने के लिए आगे आओगे ? क्या आपका अपनी पत्नी के साथ ना देना, उसके चरित्र पर लगे दाग को, आपके अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह को सच नहीं बनाते ?
To both- समाज का संदेह अपने जीवनसाथी के चरित्र पर भरोसा दिखाने से शांत होता है या उनके बातों में आकर उसका त्याग करने से ? क्या उस मर्यादा पुरुषोत्तम ने उस वक़्त अपनी पत्नी का साथ दिया होता तो यह समाज स्त्री के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ उससे लड़ने की प्रेरणा नहीं लेता ?
आज स्त्री के चरित्र पर संदेह करके उसे वनवास नही दी जाती है, उसे गृहनिवास दिया जाता है। आज समाज से निकालने का तरीका है समाज में उसे घुलने-मिलने ना दो, सामाजिक कार्यो में अपने नज़रों के सामने रखो और घर के अंदर social media से दूर। मर्यादा आपको मर्यादा में रखती है। वही मर्यादा जो जब आप किशोरावस्था में किसी से प्रेम करते हो तो उसे अपने घर में बता नहीं सकते। इस डर के कारण कि तुम्हें पालन-पोषण करने वाले माता-पिता, तुम्हारे साथ खेलने कूदने और हर एक बात share करने वाले भाई-बहन तुम्हारे चरित्र पर संदेह करेंगे। वह संस्कार जिसकी वजह से आपके जीवन के फैसले आपके अपने अपनी political, social or other benifits के लिए लेने की कोशिश करते हैं।
क्या सही और क्या गलत है, मैं यह नहीं कहूँगा। आपको कैसा जीवन जीना है, यह आपकी खुद की इक्षा है। अगर आपको अपने जीवन को बेहतर बनाना है तो एक ही उपाय है, कि आप अधिक से अधिक अपने problems, समाज और समाज के problems के बारे में study करो, उसका solution find करने की कोशिश करो। आप अधिक से समय कुछ नया सीखने में दो, ना कि दो पल की मानसिक संतुष्टि के लिए कई घंटे, घड़ी और दिन बर्बाद करो।

आपका शुभचिंतक
21st April, 2021 A.D.

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