एक पैगाम, सभी दोस्तों के नाम, कृष्ण कुणाल की लिखी कविता

Sunday, August 05, 2018 0 Comments
📃एक पैगाम, सभी दोस्तों के नाम✒
(अपने दोस्तों को उनका साथ देने और मुस्किल हालात में संभालने के लिए धन्यवाद देते हुए)
कृष्ण कुणाल की लिखी कविता-


📃एक पैगाम, सभी दोस्तों के नाम✒

कल गुमसुदा होते-होते बचा मैं,
सिर्फ और सिर्फ कुछ अजनबियों के कारण।
वो आप ही तो हो जिसने दिल जीत लिया,
अकेले किसी के चुराने से पहले।
कल भटकते-भटकते सँभला मैं,
सिर्फ और सिर्फ कुछ अजनबियों के कारण।
वो आप ही तो हो जिसने सही रास्ता दिखाया,
किसी के पीछे खुद को खोने से पहले॥

हम आपके हुए ओ अजनबी साथियों,
अब और किसी को क्यूँ ढूंढू भला।
संभालते हो मुझको बिखरने से पहले,
तुम दिल से मानते हो यह समझा मैं।
हम उनके भी चेहरे देखे हैं कईयों,
अब और किसी को क्यूँ ढूंढू भला।
खिलाते हो चेहरे मुर्झाने से पहले,
मैं अजनबी नहीं यह जाना मैं॥

आप हमारे जिंदगी में आये,
धीरे-धीरे जगह बनाई दिल में।
इस खुदगर्ज इंसान से दोस्ती की,
जिंदगी को मेरे सजा दिया।
आप मेरे जिंदगी में बहार हो लाये,
धीरे-धीरे जगह बनाई दिल में।
इस दिल की हस्ती के टुकड़े दिल को,
मुझे खुद को संभालना सीखा दिया॥

मैं ढूंढूंगा नहीं अब किसी हसींन चेहरे को,
दोस्तों जो तुम मेरे अपने हो।
किसी ऐरवा-ग़ैरवा के पीछे जिंदगी झंड नहीं करनी,
तुमसे जिंदगी जीना सीखा है।
मैं ढूंढूंगा नहीं कभी इस दिल के पेहरे को,
दोस्तो जो तुम मेरे अपने हो।
किसी एक के पल्लू में मुझे नही बंधना,
तुमसे सबका होना सीखा है॥

-AnAlone Krishna.
5th August , 2018 A.D.






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