__________Day 62__________
मैं एक bar में खड़े होकर drink order कर रहा था। वहां बगल में खड़ी लड़कियों में कोई बुदबुदाई "इसके जैसे-जैसे बहुत देखे हैं life में।"
तभी मेरी एक पुरानी दोस्त आई और मुझसे बोली,
"इतना गुजर गया यह उम्र,
पर कोई तुम सा ना मिला।"
मैंने उससे कहा,
"निगाहें मुझसे हटाओगी,
तभी तो ढूंढोगी जमाने में मुझसा कोई।
(पहली वाली के तरफ इशारा करते हुए)
इससे मिलो, इसने देखे हैं मेरे जैसे कई अपने life में।
मेरे जैसे कइयों से यह तुम्हें भी मिलवा देगी।"
मेरी दोस्त बोली, "तो यह अभी भी तुमसे जलती है !
इसने कभी ठहराई होती अपनी निगाहें तुम पर,
जमाने में हर किसी से नज़रे मिलाने को छोड़कर,
तब तो यह जान पाती तुम्हें
कि तुम्हारे छवि के भीतर तुम क्या हो।
अगर यह भी जान जाती तुम्हें
तो यह भी तुम्हें यही कहती-
बहुत देखे हैं शख़्स जमाने में मैंने
पर मैंने कोई शख़्स तुमसा ना देखा।"
इस काल्पनिक किस्से का अभिप्राय यह है कि, लोग हमारे बारे में negative criticism कर सकते हैं। पर हम अपना अगर positive approach रखे, तो हम इसका भी मजे ले सकते हैं।
वैसे अभी तक मैं अपने life में कभी भी किसी bar में नहीं गया।
-AnAlone Krishna
27th March, 2024 A.D.

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